शनिवार, मई 21

सपनो के खौफ में जिंदगी की जीत

 सर्जना शर्मा

 सपनों की रहस्यमयी दुनिया पर पिछली पोस्ट में मैनें लिखा था कि सपने कैसे अनहोनी का संकेत दे जाते हैं लेकिन हम उन्हें केवल सपना मान कर भूल जाते हैं और जब कुछ दिन या महीनों के बाद सपना सच होता है तो हम सोचते हैं अरे इस घटना के बारे में तो मुझे पहले ही सपना आ गया था । पिछली पोस्ट में मैनें दो ऐसी घटनाओं का ज़िक्र किया था आज एक और सच्ची घटना ----

                              1998 की बात है गर्मियों के दिनों में मुझे एक सपना आया कि मेरी बहन का बड़ा  बेटा मेरे हाथ से छूट कर एक नदी में बह गया है मैं उसे पकड़ने की कोशिश करती रही लेकिन वो नदी के बहाव के साथ बहता गया । मेरी नज़र उसी पर रही और कोशिश भी कि किसी तरह उसे नदी से निकाल लूं . मैं दूसरी तरफ से घूम कर नदी के किनारे गयी और तब तक मेरा भांजा भी वहां पहुंच गया और मैं उसे नदी के निकाल कर ले आयी और वो बिल्कुल ठीक ठाक था . सुबह उठ कर मैनें घर में सबको ये सपना बताया और मेरे पापा और बीजी और हम सबने फैसला किया कि बच्चों को नदी या तालाब के पास लेकर नहीं जाना है। बचाव रखना है। तीन चार महीने बीत गए हमारे मन से भी सपने का खौफ कम हो गया।

                                 दिसंबर में क्रिसमिस की छुट्टियों में   मेरी बहन  अपने दोनों बेटों के साथ अपने पति के पास पंजाब चली गयी ।  उन दिनों  मेरी बहन के पति की अबोहर के पास गोविंदगढ़ में पोस्टिंग थी । आबादी से दूर आर्मी  का ये इलाका भाखड़ा बांध से आने  वाली इंदिरा गांधी कैनाल के पास था।  बच्चों के लिए ऐसी जगहों में खेलने कूदने और मस्ती करने के भरपूर अवसर रहते हैं। मेरी बहन के अलावा के और अफसरों के बच्चे भी  वहां  थे और सब मिल कर खूब धमाचौकड़ी करते। एक दिन चार बच्चे ,मेरी बहन का बड़ा बेटा कार्तिकेय कमांडिंग ऑफिसर का बेटा अर्जुन वेणुगोपाल और दो अन्य आर्मी अफसरों के बच्चे बिना किसी को बताए नहर के किनारे खेलने चले गए। लंच का समय था अर्जुन को उनका सहायक आ कर ले गया। अब एक बच्चे के मन में ना जाने क्या आया कि उसने कार्तिकेय को नहर में धक्का दे दिया। सभी बच्चों की उम्र पांच छह साल के आसपास थी। नहर लगभग 12 फीट गहरी है और पानी का बहाव बहुत तेज़। धक्का देने के बाद वो आवाज़े लगता रहा लेकिन कार्तिकेय तब तक डूबने लगा था और उस बच्चे  दिखाई देना बंद हो गया। तब वो परेशान हुआ और भागकर अर्जुन और उनके सहायक को वापस बुला कर लाया। लेकिन कार्तिकेय ना आवाज़ का जवाब दे रहा था और ना ही नज़र  आ रहा था। अर्जुन के सहायक ने और बच्चों ने मिल कर शोर मचाया। इतने में मेरे जीजा जी की युनिट  का एक और जवान वहीं से गुज़र रहा था।  उसे जब बात पता चला तो वो झट से नहर में कूद गया वो अच्छा तैराक माना जाता था , लेकिन उसे कार्तिकेय मिला ही नहीं उल्टे वो भी  तेज़ धारा में बहने लगा । इतने में कुछ और जवान इक्ट्ठे हो गए ।  मेरे जीजा की युनिट  सिखों की है सब लोग पगड़ी पहनते हैं नहर के किनारे खड़े एक जवान ने अपनी पगड़ी खोल कर नहर में कूदे जवान की तरफ फैंकी और एक सिरा स्वयं पकड़े रखा । लगभग डेढ़ किलोमीटर जाने के बाद उस जवान को कार्तिकेय मिल गया और अपनी पीठ पर लाद कर वो उसे बाहर लाया । सबसे पहले तो सेना की ट्रेनिंग के अनुसार उसने कार्तिकेय को उल्टा करके पेट से पानी निकाला । और फिर उसे गोद में लिए लिए ही मेरी बहन के पास लाया । तब को बहुत सारे जवान बच्चे और महिलाएं जुट गए थे । मेरी बहन ने शोर सुना और थोड़ी हैरान भी कि इतने लोग एक साथ हमारे घर की तरफ क्यों आ  रहे हैं । जब उन्होने कार्तिकेय को लाकर लिटाया और पूरी बात सुनाई तो मेरी बहन सुन्न रह गयी । सर्दियों के दिन इतने सारे कपड़े जूते स्वेटर पहले बच्चा कुछ भी  हो सकता था । लेकिन कार्तिकेय अविचलित था । ना डरा ना उसके चेहरे पर हादसे की घबराहट ।
           खैर मेरी बहन और उसके पति के मन पर उस समय क्या बीती होगी कोई भी  अनुमान लगा सकता है । बचाने वाले  जवान को उसकी बहादुरी के लिए पुरस्कृत किया गया।
                                                                   मेरी बहन और उसके पति ने हमें दिल्ली में इस बारे में कोई खबर नहीं दी। जब वो जनवरी में लौटी तो उसने पूरी किस्सा सुनाया । घर में वातावरण बहुत भावुक हो गया ।  भगवान को हमने कोटि कोटि धन्यवाद दिया  की उसकी  अपार कृपा  से हमारा बच्चे सिर से अनहोनी टल गयी । मैनें उससे पूछा -- तुम्हे डर नहीं लगा पानी में ? उसने हमें जो उत्तर दिया उसे सुन कर हम तो हतप्रभ रह गए. उसने कहा ---" बिल्कुल नहीं मम्मी मेरे साथ भगवान थे । उन्होने मुझे डरने ही नहीं दिया पकड़े रखा "। पांच साल के बच्चे से ऐसे उत्तर की अपेक्षा हमें  नहीं थी । लेकिन भगवान के प्रति मेरी आस्था और गहरी  हो गयी ।
                                                                                                    और चार महीने पहले आया सपना सच हो गया । मेरी बहन ने बताया कि उस दिन कार्तिकेय ने -- इस्कॉन में मिलने वाली टी शर्ट पहली हुई थी -- जिस पर भगवान कृष्ण बने थे और लिखा था -- आई लोस्ट माई हार्ट इन वृंदावन ।

                                                 ये तो मेरे अपने बच्चे से जुड़े सपने हैं । सत्तर के दशक में मुझे एक दिन अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी सपने में आए । अमिताभ बच्चन ने  मुझ से कहा कि मेरी तबियत खराब रहती है हम अब दिल्ली रहने आ रहे हैं । मुझे लगा कि आजकल अमिताभ हिट हैं उनकी फिल्में देखते रहते हैं इसलिए ऐसा सपना आया । लेकिन कुछ दिन बाद ही अखबारों की सुर्खियां बनी कि अमिताभ को अस्थमा, मुंबई से दिल्ली शिफ्ट हो रहे हैं ।और फिर वो कुछ  अरसे तक अपने गुलमोहर वाले घर में दिल्ली रहे । सपने संदेश देते हैं आने वाले समय के बारे में बताते हैं इसका मुझे पूरा विश्वास है। मैनें तो आजतक ना जाने कितने ऐसे  अनुभव किए हैं ।

12 टिप्‍पणियां:

  1. सही कह रही हैं आप सर्जना जी…………कभी कभी कुछ सपनो के मतलब होते है जिनके अर्थ हम उस वक्त नही जान पाते।

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  2. bhavuk kar diya aapke sapne aur aapki post ne isse jyada main kuchh kahne kee sthiti me hi nahi..............

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  3. सपने संदेश देते हैं और भविष्य भी गढ़ते हैं।

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  4. वंदना जी, यशवंत जी धन्यवाद सपने संकेत तो देते हैं उन्हें डीकोड़ करना हमें सीखना है

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  5. शालिनी जी मैं तो इस बारे में आज तक किसी से बात नहीं कर सकती हूं जब वो घटना याद आती है या ज़िक्र होता है तो आंसू थमते ही नहीं हैं । और हर बार परमपिता परमेश्वर के घट घट व्यापी होने का विश्वास और दृढ़ हो जाता है

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  6. प्रवीण जी धन्यवाद सपनों की दुनिया अनोखी है ।

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  7. बड़ी रहस्यमयी होती है सपनों की दुनिया...
    यही कहा जा सकता है कि होनी तो होकर रहे बस अनहोनी न हो...

    जय हिंद...

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  8. बिलकुल सच कहा आपने| धन्यवाद|

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  9. बडा ही हृदय विदारक घटना थी। वास्‍तव में प्रभु ने ही बचाया। प्रकृति के रहस्‍यों को अभी मनुष्‍य जान ही कहाँ पाया है?

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  10. अजीत जी पांच साल का बच्चा कह रहा है कि मेरे साथ गॉड थे तो सच ही कह रहा होगावरना 12 फुट से ज्यादा गहरी नहर में क्या नहीं हो सकता था । बस वो उपर वाला ही है जो हर संकट में रक्षा करता है

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  11. पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ |
    बहुत सुन्दर लिखा है आपने !
    अद्भुत और विचित्र संयोग !!
    ईश्वर और प्रकृति के रहस्य को कभी भी पूरी तरह नहीं समझा जा सकता !

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