शुक्रवार, जून 3

अलविदा सलीम शहजाद, तुम्हारे जज़्बे को सलाम...सर्जना शर्मा


लापता पाकिस्तानी पत्रकार सलीम शहजाद की लाश गाड़ी में मिली। सभी टीवी चैनलों पर जब मैनें ये खबर देखी तो सकते में आ गयी। सलीम शहजाद से पिछले लगभग दो साल से ई-मेल के जरिए संपर्क बना हुआ था। सलीम शहजाद से मेरा सपंर्क उस समय हुआ जब नेट पर मैं तालिबान से संबंधित सामग्री की खोज कर रही थी। गहरी जानकारी, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में घटनाओं का विश्लेषण संबंधित सलीम का एक लेख पढ़ा और नीचे लेखक का नाम और ई मेल लिखा मिला तो उन्हें एक मेल डाली और उसका तुरंत जवाब भी आया। फिर सलीम लगातार अपने लेखों का लिंक भेजने लगे। और उनके लेख कभी कभी तो किसी ज्योतिषी की भविष्यवाणी जैसे लगते। सलीम जब लिखते कि अब इस घटना का पाकिस्तान या अफगानिस्तान में ये असर होगा तो थोड़े दिन बाद देखने को मिलता कि ऐसा ही हो रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के घटना क्रम पर सलीम शहजाद ने कई बार हमारे चैनल के लिए फोन इन भी दिए ।
सलीम से कई बार फोन पर भी बात होती। बातचीत में बहुत संजीदा और तमीज़याफ्ता । सलीम की आतंकवादी गुटों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के घटनाक्रम और अमेरिकी नीतियों पर गहरी पकड़ थी। आतंकवादी संगठनों  की पूरी जानकारी भी सलीम के पास रहती थी। सलीम कई विदेशी अखबारों में नियमित रूप से लिखते थे। और उनके लेखों को गंभीरता से लिया जाता था । सलीम सचमुच अपनी जान हथेली पर रख कर काम कर रहे थे । मई के महीने में ही सलीम ने मुझे एक मेल भेजी थी जिसमें उन्होने अपनी आने वाली किताब --- inside alqada and the taliban, beyond bin-laden and 9/11 के बारे में जानकारी भेजी थी। सलीम ने लिखा था कि इस किताब में 2002 से लेकर 2006 तक की उन सभी घटनाओं का ब्यौरा है जिनके कारण अल कायदा और तालिबान की वापसी हुई। और तो और सलीम शहजाद ने अपनी इस किताब में ये खुलासा भी किया है कि मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले का असली मास्टर मांइड कौन था और उसी ने किस तरह से अफगानिस्तान के वॉर थियेटर के आयाम बदल दिए । ज़ाहिर सी बात है इसमें वो सब कड़वे सच होंगें जिन्हें पाकिस्तान सरकार कभी पसंद नहीं करेगी। नेवी बेस पर हुए हमले की सच्चाई का खुलासा भी सलीम शहजाद  ने किया जो उनकी हत्या का कारण भी बना। सलीम शहजाद की वो किताब जिसका विमोचन 20 मई को हुआ था, आप उसे गूगल डॉट कॉम पर जाकर plutobooks.com पर देख सकते हैं और खरीद भी सकते हैं । सलीम शहजाद का अपना ब्लॉग भी था-http:/www.syedsaleemshahzad.com
उनके लेख पढ़ कर ही उनकी पैनी कलम का अहसास होता है और पता चलता है कि वो एक खोजी, निडर और बहादुर पत्रकार थे। ऐसे पत्रकार की हत्या से पाकिस्तान के अंदरूनी हालात और सरकार के रैवेये की पोल खुलती है । सलीम की हत्या की खबर से बहुत दु:ख हुआ। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। मेरी तरफ से उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि।

13 टिप्‍पणियां:

  1. सच की सज़ा सलीम शहजाद को मिली...सलीम को आप मिटा सकते हैं लेकिन सलीम के जज़्बे को नहीं...हर पत्रकार के लिए सलीम मिसाल है...सलीम भाई आप नफ़रत की इस दुनिया को छोड़कर जिस जहां में भी हैं, वहां ज़रूर आपकी सोहबत पाकर फरिश्ते भी खुश होंगे...मेरी विनम्र श्रद्धांजलि...

    जय हिंद...

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  2. बहुत दुखद है यह समाचार। आज हमें सैकड़ों शहजादों की जरूरत है।
    ईश्‍वर उनकी आत्‍मा को शान्ति दे।

    ---------
    कौमार्य के प्रमाण पत्र की ज़रूरत?
    ब्‍लॉग समीक्षा का 17वाँ एपीसोड।

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  3. ऐसे खोजी, निडर और बहादुर पत्रकार को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि...

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  4. sachche patrkaron ko ye trasdi jhelni padti hai.saleem shahzad ko hamri aur se bhi vinamra shraddhanjali.

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  5. आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  6. खुशदीप भाई ने काफी हद तक मेरे मन की बात कह दी है... पाकिस्तान के हुक्मरान खुद अपने मुल्क को तबाह करने पर तुले हुए हैं... इसलिए अंजाम उन्हें खुद ही भुगतना पड़ेगा...

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  7. इस जज़्बे की बहुत जरूरत है...
    यह विरक ही होता है...और राज्य तो इसे नेस्तानबूद कर ही देना चाहता है...करता भी रहेगा...

    सलाम...

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  8. सच का सिपाही शहीद हो गया, हार्दिक श्रद्धांजलि।

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  9. bahad sharmnak ghatna hai .ek sachche patrkar ke sath yadi aisa hota hai to pakistan ki media barbad hi ho jayegi aur shayad ho chuki hai .sarthak aalekh .

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  10. यही वे लोग हैं जो समाज में निरंकुशता पर लगाम लगाते हैं...
    अपनी जान देकर भी.
    ये प्रकाशपुंज हैं, आने वाली पीढ़ियों के लिए.

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  11. सलीम के बारे में आपसे अच्छी जानकारी मिली.उनका निधन दुखदाई है.
    हार्दिक श्रद्धांजलि.

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  12. राकेश जी सलीम शहजाद की हत्या एक दुखद घटना और खतरनाक संकेत है और जब किसी से परिचय हो तो उसे बारे में ज्यादा दुख होता है . पाकिस्तान सरकार सलीम शहजाद की जानकारियों का सदुपयोग भी कर सकती थी लेकिन मरवा क्यों दिया समझ नहीं आता

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