रविवार, जून 19

ज्योतिष का पीपली लाइव...सर्जना शर्मा



एक टीवी चैनल पर एक ज्योतिषी जी भगवा चोगा पहन कर, गले में एक मोटी सी सफेद माला डाल कर चश्मा लगाए बैठे थे । दर्शकों से सीधे फोन इन चल रहे थे । बहुत ही फनी से लग रहे थे, जिस दर्शक से उनकी बात चल रही थी आप भी सुनिए --

---- पंड़ित जी मेरा व्यापार ठीक नहीं चल रहा क्या करूं ?

---- तुम्हारी सबसे बड़ी बहन होगी ?

--- नहीं पंड़ित जी मेरे दो बड़े भाई फिर मैं और फिर मेरी एक बहन...

---- अच्छा तुम्हारी बहन को एलर्जी रहती  होगी ?

-- नहीं तो कभी नहीं रही...

---- फिर तु्म्हें बहुत एलर्जी रहती होगी

---- नहीं मुझे तो कोई एलर्जी नहीं है...

--- पंड़ित जी के सभी अनुमान गलत लेकिन खिसियाए से पंड़ित जी बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाते रहे...

--- अच्छा तुम अपने घर के जिस कमरे में रहते हो वो बदल लो, दूसरी मंज़िल पर रहते हो...

---- नहीं हमारा  घर तिमंजिला है मैं तीसरी मंज़िल पर रहता हूं...

--- दर्शक से सीधे लाइव वार्तालाप चल रहा है और पंड़ित ती अपनी सड़क छाप भाषा में बात करते जा रहे थे...

-----अच्छा तो तुमने कभी  किसी से प्यार किया है....

--- नहीं पंड़ितजी किसी से नहीं किया.. 

--- अब पंड़ित जी के चेहरे पर एक विचित्र सी मुस्कान आयी और एंकर से मुखातिब हो कर बोले-

- लो कैसा बंदा है बंदे ने कभी प्यार ही नहीं किया... 
--- अरे  भाई जीवन में प्रेम नहीं तो फिर क्या कुछ भी नहीं... 
 फिर उन्होने दर्शक को कुछ नुस्खे बताए कि कौन से ग्रह के लिए क्या करो...

और इन पंडित जी के अपने इतने उच्चारण दोष हैं कि आप सुन कर हंसते हंसते लोट पोट हो जायेंगें, मनोरंजन के लिए ऐसे प्रोग्राम देखे जा सकते हैं लेकिन देख कर दुख होता है कि एक प्राचीन विद्या को कैसे हल्के में लिया जाता है और भोले भाले दर्शकों से खिलवाड़ किया जाता है ।

एक और चैनल पर एक तथाकथित पंड़ित जी आते है -- मूल रूप से वो मुस्लिम हैं, लेकिन उन्होने अपना नाम बदल रखा है और धार्मिक चैनलों पर समय खरीद रखा है क्योंकि इन लोगों के पास इतना पैसा होता है जो ये लोगों से पूजा पाठ तंत्र मंत्र के नाम पर वसूलते रहते हैं ।
चैनल सर्फिंग में एक दिन देखा  ये जनाब भी  दर्शकों से सीधे वातार्लाप कर रहे थे एक लड़की लाईन पर थी....

----- पंड़ित जी नमस्कार...
--  नमस्कार.... आंखें बद किए हुए पंड़ित जी ने उत्तर दिया....

----- मेरी शादी नहीं हो रही है 21 साल की हो गयी हूं ...

---- अच्छा शादी नहीं हुई कोई बातनहीं मैं करवाऊंगा तुम्हारी शादी बस तुम मेरे बताए उपाय करना और फिर देखना कैसे महीने भर में दुल्हन बन जाओगी...
 
---- अब लड़की का गला रूंध गया लगभग रोते रोते उसने कहा -- मैं और मेरे घरवाले तो परेशान हो चुके हैं बस अब आपका ही सहारा है ...
--  उस बाबा ने लड़की को कई उपाय बताए जो मुझे याद नहीं लेकिन एक जो इंस्टेंट   उपाय बताया वो सुनिए...

--- बेटी तुम एक काम कर सकती है अगर ये तुमने कर लिया तो समझ लो बस 15 दिन में शादी पक्की...

---- हां बताओ  ना बाबा जी मैं ज़रूर करूंगी, कुछ भी कर लूंगी....

---- अपनी किसी शादीशुदा सहेली के घर जाओ उससे उसका शादी का जोड़ा एक दो दिन के लिए मांग लाओ उसे घर ला कर पहनो,
और साथ ही उन्होनें कुछ पूजा पाठ और मंत्र भी बताए
 
बाबा जी भी  ये अच्छी तरह से जानते हैं कि कोई भी महिला अपनी शादी का जोड़ा किसी को नहीं देगी और लड़की ये उपाय कर नहीं पायेगी....

 इन बाबा जी का माया जाल दूर दूर तक फैला है तीन सवालों के दस हज़ार रूपए लेते हैं बहुत से लोग इनके जाल में फंसते हैं । पैसा एडवांस जमा कराते हैं अगर कभी सामने वाला तगड़ा मिल जाए जैसा कि एक बार इन्हें मिला । वो मुंबई का रहने वाला था उसने किसी तरह हमसे संपर्क किया और कईं  संपर्कों  से होते हुए जब बाबा जी तक बात पहुंची तो मौके की नज़ाकत को भांपते हुए उन्होनें ना केवल दस हज़ार रूपए लौटाए बल्कि अपनी सफाई पेश की और मुफ्त ज्योतिषीय सलाह देने को राजी हो गए क्योंकि वो अच्छे से जानते थे कि इस मामले में उन्हें लेने के देने पड़ सकते हैं और दुकान भी  बंद हो सकती है ।
                                       
आज हर चैनल पर कपूर तनेजा मित्तल , सिन्हा , श्रीवास्तव , आदि आदि भिन्न प्रकार के पंड़ित आपको मिलेंगें और तमाम तरह के नुस्खे  सुझायेंगें कुछ तो ये भी बताते हैं कि पति को वश में करने के लिए क्या किया जाए । हर न्यूज़ चैनल में आजकल खबरों से ज्यादा ज्योतिष , वास्तु आदि के शो हैं । और कुछ तो बाकायदा ज्योतिषियों और तर्कशास्त्रियों में भिडंत भी  करवा देते हैं ।
           
ज्योतिष के कुछ नियम है जिनका पालन करना ज्योतिषी के लिए बहुत आवश्यक होता है । और ज्योतिष ऐसी विद्या भी नहीं है कि एक सवाल पूछते ही तुरंत उसका उत्तर हाज़िर है...गणना करने में भी  समय लगता है कुंडली की विवेचना में भी समय लगता है । लेकिन फिर भी लोग ना जाने क्यों इन ऑन लाईन   पंड़ितो से सवाल पूछते रहते हैं और इनके हाथों बेवकूफ बनते रहते हैं । दुख की बात तो ये हैं कि जिनके कंधे पर समाज में जागृति लाने की ज़िम्मेदारी है वही इन्हे प्रमोट कर रहे हैं । ज्योतिष को ईश्वर के चक्षु कहा गया है और हमारे संतों ऋषि मुनियों ने इस विधा पर बहुत काम करके ग्रंथों की रचना की है  लेकिन आज उसका सदुपयोग कम और दुरूपयोग ज्यादा हो रहा है,  शायद ही इनमें से कोई प्राचीन ज्योतीषीय ग्रंथों को पढ़ता  होगा  ।            
          
 

17 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा
    बढिया पोल खोल दी आपने।
    इन फ़र्जी ज्योतिषियों ने ज्योतिष जैसे विज्ञान पर से लोगों की विश्वास उठा दिया।
    आभार

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  2. वाकई पीपली लाइव है...

    जय हिंद...

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  3. andhishvasi logon ke karan hi aise programme chal rahe hain aur chalte rahenge.sarthak post samjhdar logon ke liye.

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  4. hum khud in per nirbhar hai ..............
    vo bhi kya karein?

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  5. आजकल न्यूज चैनल वाले भी ऐसे प्रोग्राम लाने लगे हैं। मैं तो कॉमेडी देखने के लिये कभी-कभी इन्हें देख लेता हूँ :)
    सास-बहू सीरियल की अभिनेत्रियां भी आती हैं ज्योतिषी बनकर, एक चेन में कुछ लटका कर हिलाती है और उपाय बताती है। हा-हा-हा

    प्रणाम

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  6. एक बार मशहूर ठग नटवरलाल का साक्षात्‍कार पढ़ा था, तब उसने कहा था कि जब तक दुनिया में लालच है, हमारा धंधा बदस्‍तूर जारी रहेगा।

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  7. ललित जी आपने ठीक कहा हज़ारों साल पहले तारो, नक्षत्रों , सौर मंडल की पल पल की गति का लेखा जोखा तैयार करने वाले हमारे पूर्वज वैज्ञानिक थे उन्होनें पूरी काल गणना की ज्योतिष शास्त्रों की रचना की लेकिन अब अधकचरे ज्ञान वाले तथाकथित पंडित अपनी दुकाने चला रहे हैं कई ऐसे ज्योतिषियों को मैं जानती हूं जिन पर मुकदमें चल रहे हैं लोगों से पचास पचास हज़ार रूपया ठगा लेकिन काम उनका कुछ हुआ नहीं

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  8. शालिनी जी , खुशदीप जी रोशी जी और अंतर सोहिल आपने लेख के मर्म को समझा . ये ज्योतिषी भी ठीक बैसे ही खतरनाक हैं जैसे नीम हकीम और झोला छाप डॉक्टर ये लोगों का बाला तो कर ही सकते अपनी जेब ज़रूर भर लेते हैं

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  9. अजीत जी नमस्कार आप ठीक कह रही है बिना मेहनत किए टोटके करके शादी ,नौकरी , मकान दौलत सब मिल जाता तो सभी लोग बस यही करते और फिर ये तथाकथित ज्योतिषी पहले अपना भला क्यों नहीं कर लेते .

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  10. जब तक पैसे देकर पूछने वाले आते रहेंगे इनकी दुकान नानस्टाप चलती ही रहेंगी फिर इससे क्या फर्क पडता है कि कोई तगडा सामने आ जावे और खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे वाली शैली में ये उसके पैसे वापस करके उससे Sorry भी करलें ।

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  11. सुशील जी नमस्कार आप कैसे हैं ज्योतिष का धंधा आजकल सबसे ज्यादा फायदे का है इनवेस्टमेंट ज़ीरो और रिटर्न मोटा ।

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  12. आपके इस लेख पर कई बार विस्तृत टिपण्णी करने की कोशिश की है.परन्तु,हर बार प्रेषित नहीं हो पा रही है.कारण समझ नहीं आ रहा.
    इस बार इतना ही कि हमे अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिये.कर्मफल में अपने आप सुधार आ जायेगा.भगवद्गीता के १८ अध्यायों में १८ योग बताये गए हैं.किसी में भी ज्योतिष का कोई जिक्र नहीं है.केवल कर्म करने के अधिकार पर ही सर्वत्र जोर दिया गया है.इसलिये ज्योतिष के बजाय हमे 'तत्व ज्ञान' प्राप्त करना अधिक अभीष्ठ है.

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  13. जब तक पैसे देकर पूछने वाले आते रहेंगे इनकी दुकान चलती ही रहेंगी

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  14. राकेश जी ,
    ज्योतिष प्राचीन विद्या है . पराशर ऋषि और अन्य कीं ऋषियों ने इस पर सार्थक काम किया है . ज्योतिष को वेदों का अंग माना गया है . गीता उपदेश एक सर्वथा भिन्न परिवेश में दिया गया ।
    कमी विद्या में नहीं इसकी प्रेक्टिस करने वाले ज्येतिषियों में है । पढ़ते लिखते हैं नहीं और पैसा कमाने में लगे रहते हैं

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  15. patili- the village

    बृहद संहिता में महान गणितज्ञ वराहमिहिर ने एक अच्छे ज्योतिषी के लक्ष्णों का वर्णन किया है । और साथ ही ये भी बताया है कि भगवान के द्वार पर , और ज्योतिषी के पास कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए यथा शक्ति भेंट दक्षिणा देनी चाहिए . लेकिन अब तो तथाकथित ज्योतिषियों के लालच का अंत नहीं है पूजा कराने के ही लाखों रूपए लेते हैं और प्रशनों के उत्तर देने के हज़ारों रूपए

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  16. सर्जना जी,
    ज्योतिष विद्या है,इससे इंकार नहीं.परन्तु,इस पर निर्भरता का हमारे शास्त्रों में सन्देश नहीं दिया गया है.'तत्व ज्ञान' को ही महत्वपूर्ण माना गया.रामायण (रामचरितमानस)में त्रिकालज्ञ महामुनि वशिष्ठ जी,राम के वन गमन के बाद भरत जी से कहते हैं
    'सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखू कहू मुनि नाथ
    हानि-लाभ्,जीवन-मरण,जस-अपजस विधि हाथ'
    वशिष्ठ जी ने ही राम के राज्याभिषेक का शुभ महूरत निर्धारित किया था.परन्तु निष्फल होने के कारण वे ही कहतें हैं कि सब कुछ 'विधि'
    अर्थात कुदरत के 'कानून'के हाथ में है.यह कानून कर्म और कर्म- फल पर आधारित है.इसीलिए गीता में कर्म पर ही सर्वत्र जोर दिया गया है.कर्म-फल पर कोई अधिकार नहीं माना गया.

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  17. सर्जना जी,
    आपके बहुत दिनों से कोई समाचार नहीं हैं.
    आपके अच्छे स्वास्थ्य व कुशल मंगल की कामना करता हूँ.
    जल्दी दर्शन दीजिये.

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