गुरुवार, अगस्त 21

मौका चूक गए बाबा रामदेव .... डरते नहीं तो आज होते संत सिपाही

मौका चूक गए बाबा रामदेव ---- --------------------------------------------- योगगुरू बाबा रामदेव आजकल ना जाने कहां हैं । केंद्र में नयी सरकार के गठन के बाद जिस तरह की भूमिका की उनसे अपेक्षा की जा रही थी वो दिखना तो दूर बाबा ही नदारद हैं । चुनावों से पहले जिस तरह बाबा ने सिंह नाद किया था उससे बहुत सी उम्मीदें जगीं थीं । बाबा रामदेव ने योगभ्यास को एक नवजीवन दिया इसमें दो राय नहीं हैं . योग की क्रांति बाबा ने जन जन में ला दी । लेकिन बाबा चूक गए ।दिल्ली के रामलीला मैदान में यदि बाबा ने उस दिन बहादुरी दिखायी होती तो आज सारा परिदृश्य बदला होता . बाबा रामदेव औरतों के कपड़े पहन कर छुप कर ना भागते तो आज उन्हें संत सिपाही के रूप में माना जाता । बाबा रामदेव हरिद्वार में पले बढ़े वहां संतों और बाबाओं की लंबी परंपरा है . एक बार दुनिया त्याग दी तो फिर डर किसका । अपने लिए नहीं जीना समाज के लिए जीना है तो फिर गोली बंदूक का डर क्यों । इसी बात पर आपको ऋषिकेश के स्वर्ग आश्रम की एक सच्ची घटना बताती हूं । ये बात 20 वीं सदी के आरंभ की है . स्वर्ग आश्रम में एक बाबा होते थे काली कंबली वाले . सच्चे साधु, सच्चे संत, सच्चे तपस्वी उनकी एकमात्र संपत्ति थी उनका काला कंबल इसीलिए उनका नाम पड़ गया काली कंबली वाले बाबा । आज से लगभग 114 साल पहले हरिद्वार ऋषिकेश में घने जगंल होते थे । ना आज की तरह सड़के थी और ना ही इतनी आबादी । लोग कारवां में आते थे हरिद्वार स्नान करने । इस इलाके में एक दुर्दांत डाकू होता था गुज्जर जाति का सुलतान । सुलतान अमीर तीर्थयात्रियों को लूटता था । संपन्न आश्रमों में डाका डालता था और दिन के समय आता था । लेकिन उसके भी कायदे कानून थे । डाका डालने से पहले वो आश्रम को दो दिन पहले सूचना दे देता था । एक बार उसने स्वर्ग आश्रम को सूचना भेजी की वो लूटने आ रहा है । बाबा काली कबंलीवाले आश्रम के कर्ता धर्ता थे । बाबा ने आश्रम के सभी निवासियों से कहा कि घबराना नहीं मैं सब संभाल लूंगा । जिस दिन गुज्जर सुलतान को आना था बाबा ने सबको अपने अपने कमरों में ही रहने की हिदायत दी और स्वयं खजाने की चाबियां लेकर आश्रम के मुख्य द्वार के पास बैठ गए । सुल्तान डाकू 6 अन्य डाकूओं के साथ हथियारों से लैस हो कर घोड़ों पर आया । बाबा ने आगे बढ़ कर सुल्तान का स्वागत किया । उसे खजाने की चाबियां थमाई और कहा -- "सुल्तान तुम्हें आश्रम के खजाने से जो लेकर जाना है ले जाओ . लेकिन तुम किसी की भी जान नहीं लोगे एक भी गोली नहीं चलाओगे । अगर मारना ही है तो मुझे मारना "। बाबा ने सुल्तान की आवभगत की भी पूरी तैयारी कर रखी थी । बाबा काली कबंलीवाले ने सुल्तान और उसके साथियों को पानी पिलाया और कहा -- "थोड़ी देर विश्राम कर लो फिर खजाना लूट लेना । तुम्हारे और तुम्हारे साथियों के लिए मैने भोजन बनवा कर रखा है भोजन करे बिना मत जाना । मुझे तुमसे ना कोई दुश्मनी है ना तुम्हारा डर है । इस इलाके का सर्वोच्च पुलिस ऑफिसर मेरा भक्त है . मैं चाहता तो पूरे स्वर्ग आश्रम को छावनी में बदल देता . लेकिन नहीं तुम मेरे लिए एक इंसान हो । ये तुम्हारा पेशा है इसलिए मैनें कुछ नहीं किया मेरे लिए धन दौलत और मेरे प्राण कोई मायने नहीं रखते "। सुल्तान डाकू सन्न रह गया । उसे उम्मीद ही नहीं थी कि बाबा काली कंबली वाले इतनी आसानी से खजाने की चाबी दे देंगें और उसकी दिल से आवभगत करेंगें । वो बाबा के पैरों में गिर पड़ा उसके पास जितनी सोने की अशरफियां थीं उसने बाबा को थमा दी कहा मेरी तरफ से आश्रम को दान । उसने प्रेम पूर्वक अपने साथियों सहित बाबा का बनवाया हुआ भोजन किया और चला गया । अगर बाबा रामदेव दिल्ली के रामलीला मैदान में उस रात को दिल्ली पुलिस के सामने सीना तान कर खड़े हो जाते और कहते -- पहली गोली मेरे उपर चलाना औऱ मेरी लाश के उपर से गुज़र कर मेरे भक्तों पर हमला करना तो दिल्ली पुलिस में इतनी हिम्मत ना होती कि वो निहत्थे और मासूम लोगों पर कहर ढ़ाती. और ना ही बाबा को औरतों के कपड़े पहन कर भागना पड़ता । खैर अब तो बाबा रामदेव मौका चूक चुके हैं । ( बाबा काली कंबली वाले का ये किस्सा shri M की किताब -- APPRENTICED TO A HIMALAYAN MASTER --- AN AUTOBIOGRAPHY OF A YOGI में लिखा है ये सच्ची घटना है )

6 टिप्‍पणियां:

  1. आजकल कहाँ सच्चे संत मिलते हैं सर्जना जी तभी तो ये हाल होता जा रहा है कि किसी पर विश्वास ही नही होता

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  2. आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (23-08-2014) को "चालें ये सियासत चलती है" (चर्चा मंच 1714) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. शास्त्री जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका स्नेह मुझ पर हमेशा बना रहता है उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद आभार

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  5. वंदना जी आप ,सही कह रही है आजकल सब कुछ बिक रहा है अखाड़े भी महामंडलेश्वर की उपाधि करोड़ों में बेच रहे हैं । सच्चा संत किसी से नहीं डरता मौत उसके लिए कोई मायने नहीं रखती

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  6. blog prahari आप का बहुत बहुत धन्यवाद मुझे अपने ग्रुप में शामिल करने के निमंत्रण का अभी कोशिश करती हूं आप मुझे सूचना तो भेजेंगें ना ब्लॉग प्रहरी में शामिल होने की

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